हिन्दुस्तानी एकेडेमी में जन सूचना अधिकार का सम्मान

जनसूचना अधिकारी श्री इंद्रजीत विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी,इलाहाबाद व मुख्य कोषाधिकारी, इलाहाबाद। आवास-स्ट्रेची रोड, सिविल लाइन्स, इलाहाबाद कार्यालय-१२ डी,कमलानेहरू मार्ग, इलाहाबाद
प्रथम अपीलीय अधिकारी श्री प्रदीप कुमार्, सचिव,हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद व अपर जिलाधिकारी(नगर्), इलाहाबाद। आवास-कलेक्ट्रेट, इलाहाबाद कार्यालय-१२डी, कमलानेहरू मार्ग, इलाहाबाद
दूरभाष कार्यालय - (०५३२)- २४०७६२५
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शनिवार, 26 सितंबर 2009

हिन्दी चिठ्ठों की किताब के लिए अपनी चुनिन्दा पोस्ट भेंजिए...।

हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में अनेक प्रतिष्ठित लेखक और साहित्यकार अपनी रचनाएं अन्तर्जाल पर प्रकाशित कर रहे हैं लेकिन उससे कहीं बड़ी संख्या ऐसे ब्लॉगलेखकों की है जिन्होंने अपनी रचनाधर्मिता के नैसर्गिक प्रवाह को यूँ ही निसृत होने दिया है। अपनी मस्ती में डूबे हुए ये अनूठे चिठेरे इस चक्कर में ही नहीं पड़ते कि उनका लिखा हुआ साहित्य की कोटि में रखा जाता है कि नहीं। बहुत से ब्लॉग लेखक ऐसे भी हैं जो अपनी पोस्टों के माध्यम से समाज, संस्कृति, राजनीति, घर-परिवार, विज्ञान, इतिहास, भूगोल आदि के विषयों पर ज्ञान का असीमित भण्डार उड़ेल रहे हैं। यह सब कुछ हिन्दी ब्लॉग समुच्चय को एक क्लाइडोस्कोप का रुप गुण देता है।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी की स्थापना हिन्दुस्तानी (हिन्दी और उर्दू) भाषा को विकास की सीढ़ियों पर ले जाने वाले सभी सार्थक प्रयासों को एक ऐसा मंच देने के उद्देश्य से हुई थी जहाँ मौलिक प्रतिभाओं को अपनी रचनाधर्मिता को प्रकाशित कराने का अवसर मिले और विद्वानों-मनीषियों के शोधपरक कार्यों को सामान्य विद्यार्थियों, अध्येताओं और साहित्यानुरागियों के उपयोग हेतु सहज ढंग से उपलब्ध कराया जा सके। इन उद्देश्यों की पुर्ति के लिए एकेडेमी द्वारा करीब डेढ़ सौ अमूल्य पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है और साहित्यिक गोष्ठियों, व्याख्यान मालाओं, सेमिनार और प्रतिभा सम्मान समारोहों का आयोजन अनवरत किया जाता रहा है।

अपनी इसी उत्कृष्ट परम्परा के निर्वहन के क्रम में हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के सौजन्य से हिन्दी ब्लॉगिंग के सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का आयोजन आगामी २३-२४ अक्टूबर, २००९ को किया जा रहा है। इस अवसर पर देश भर से अनेक चिठ्ठाकारों को आमन्त्रित कर अभिव्यक्ति के इस नये माध्यम के इतिहास, स्वरूप और प्रमुख प्रवृत्तियों पर दो दिवसीय चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर पारम्परिक साहित्य जगत के अनेक प्रतिष्ठित विद्वान भी प्रतिभागी होंगे।
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इस अवसर पर एकेडेमी द्वारा एक पुस्तक का प्रकाशन कर उसके तत्समय लोकार्पण का निर्णय भी लिया गया है जिसमें लगभग पचास चिठ्ठाकारों की चुनी हुई एक-एक ब्लॉग पोस्टों को सम्मिलित कर एक प्रतिनिधि संकलन तैयार किया जाएगा। इसके लिए हिन्दी ब्लॉगर्स से प्रविष्टियाँ आमन्त्रित की जाती हैं। एक ब्लॉगर से केवल एक प्रविष्टि ही स्वीकार की जाएगी। हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा गठित सम्पादक मण्डल प्रविष्टियों के चयन पर विचार करेगा जिसकी संस्तुतियों के आधार पर पुस्तक का अन्तिम रूप निर्धारित किया जाएगा। एकेडेमी के ई-मेल पते (hindustaniacademy@gmail.com) पर अपनी प्रविष्टियाँ दिनांक ५.१०.२००९ की मध्यरात्रि तक अवश्य प्रेषित कर दें।

चिठ्ठाकार मित्रों द्वारा पुस्तक के शीर्षक व आवरण पृष्ठ के सम्बन्ध में यदि कोई सुझाव दिया जाता है तो उसका भी स्वागत है। यह पुस्तक हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से प्रिन्ट माध्यम के लिए एक अनुपम भेंट हो, यही हमारी आकांक्षा है।

सचिव - हिन्दुस्तानी एकेडेमी

सोमवार, 15 सितंबर 2008

१२ डी, कमला नेहरू रोड, इलाहाबाद से उठे कदम अन्तर्जाल की ओर

(यह पोस्ट पहले वर्डप्रेस पर थी किन्तु वहाँ कुछ तकनीकी बाधाओं को देखते हुए मुझे इसे टिप्पणियों समेत यहाँ लाना पड़ा। अब नियमित पोस्टें यहीं मिलेंगी। सहयोग के लिए धन्यवाद।)

हिन्दी प्रेमी भाइयों और बहनों,

आज १२-१३ सितम्बर की मध्य रात्रि के समय मैं ‘हिन्दुस्तानी एकेडमी’ को अन्तर्जाल पर उतारने का दुस्साहस कर रहा हूँ। जी हाँ, दुस्साहस इस लिए कि इस संस्था का इतिहास जिन लोगों से बना है, उनके व्यक्तित्व के आगे मेरी गिनती सूर्य के आगे एक दीपक की भी नहीं है। हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वानों, शोधकर्ताओं, मनीषियों, और लब्ध-प्रत्तिष्ठ साहित्यकारों की कर्मस्थली रही इस एकेडमीं के बारे में कुछ लिख सकने की क्षमता मुझ जैसे गैर साहित्यिक विद्यार्थी के लिए दुस्साहस ही तो है।

लेकिन मैने इस संस्था में अपनी भूमिका साहित्य लिखने या इसकी समीक्षा करने की नहीं तय की है। बल्कि श्री राज्यपाल महोदय द्वारा इस संस्था के एक गैर साहित्यिक (कोषाध्यक्ष) पद हेतु नामित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति के बाद इस उत्कृष्ट प्रांगण में प्रवेश करने का बहाना मिलने पर मैने अपने चिठ्ठाकारी के अत्यल्प अनुभवों का ही प्रयोग कर इस बिसरायी जा रही संस्था को आप सबके ध्यान में लाने और इसके गौरव को नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए आप सभी के सक्रिय योगदान की अपील करने के लिए मैने इस ब्लॉग का माध्यम चुना है।

अतः, हे हिन्दी सेवी ब्लॉगर बन्धुओं एवं अन्यान्य विद्वतजन, मेरा अनुरोध है कि अपनी प्रिय भाषा की उन्नति व प्रगति के लिए आप जो भी और जिस रूप में भी कर रहे हैं, उसकी जानकारी इस मंच पर टिप्पणी के माध्यम से अथवा अपनी रचनाओं को ई-मेल अथवा डाक के माध्यम से संस्था को उपलब्ध कराकर दें। हिन्दी-विमर्ष के इस मंच पर निःस्वार्थ सेवा के उद्देश्य से अवश्य पधारें।

उत्तर प्रदेश शासन के भाषा विभाग द्वारा इस संस्था के माध्यम से निम्न योजनाएं संचालित की जाती हैं:

  1. मौलिक हिन्दी कृतियों में सृजनात्मक साहित्य का प्रकाशन।

  2. हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय तथा विदेशी भाषाओं के काव्य, नाटक व कथा साहित्य का हिन्दी अनुवाद तथा प्रकाशन।

  3. प्रतिष्ठित विद्वानों तथा साहित्यकारों की व्याख्यानमाला का आयोजन।

  4. हिन्दुस्तानी त्रैमासिक नाम से साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन।

  5. उत्कृष्ट कोटि के एवं प्राचीन साहित्यिक संदर्भग्रन्थों के पुस्तकालय का संचालन।

शीघ्र ही यहाँ ‘एकेडमी’ में संरक्षित अमूल्य साहित्यिक धरोहर से आप सबको परिचित कराने का क्रम प्रारम्भ किया जाएगा। इससे यदि आप पहले से किसी रूप में जुड़े रहे हों तो अपने संस्मरण भेज सकते हैं। आपके सहयोग का स्वागत है।

(‘हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक में प्रकाशित रचनाओं का कोई पारिश्रमिक संस्था द्वारा फिलहाल भुगतान नहीं किया जाता है।)

-सिद्धार्थ

ई-मेल: hindustaniacademy@gmail.com

मेरा मेल: tripathito@gmail.com

डाक का पता: १२डी, कमला नेहरू मार्ग, इलाहाबाद (उ.प्र.) २११००१

11 Responses to “१२ डी, कमला नेहरू रोड, इलाहाबाद से उठे कदम अन्तर्जाल की ओर”

  1. समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’ Says:

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

  2. Gyan Dutt Pandey Says:

    यह बहुत अच्छा है। होने वाले विभिन्न व्याख्यानों/गोष्ठियों की अग्रिम जानकारी ब्लॉग पर मिले तो इलाहाबादी लोग फायदा ले सकते हैं।
    त्रैमासिक पत्रिका के मुख्य अंश उपलब्ध करवयें पोस्टों के माध्यम से।
    आपके उत्साह में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी हो! अच्छा मिशन लिया है आपने!

  3. अनिल रघुराज Says:

    हिंदुस्तानी एकेडमी की बहुतेरे संगोष्ठियां अब भी याद हैं जिनके छात्र जीवन के दौरान शिरकत की थी। सिद्धार्थ जी, अच्छी जिम्मेदारी मिली है आपको। बधाई…

  4. Raj bhatia Says:

    बहुत बहुत बधाई नये बांलाग की,

  5. shobha Says:

    अच्छा प्रयास है. मेरी शुभ कामनाएं आपके साथ हैं.

  6. Abhishek Ojha Says:

    शुभकामनाएं !!

  7. ई-गुरु राजीव Says:

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है,त्रैमासिक पत्रिका उपलब्ध करवयें पोस्टों के माध्यम से.

  8. VIVEK SINGH Says:

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

  9. उन्मुक्त Says:

    आपका स्वागत है। पत्रिकाओं को अन्तरजाल पर क्यों नहीं उपलब्ध करवाते।

  10. राजेंद्र माहेश्वरी Says:

    अच्छा प्रयास है. मेरी शुभ कामनाएं आपके साथ हैं.

  11. Dr. Kavita Vachaknavee Says:

    नए चिट्ठे का स्वागत है.
    निरंतरता बनाए रखें.
    खूब लिखें, अच्छा लिखें.

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