हिन्दुस्तानी एकेडेमी में जन सूचना अधिकार का सम्मान

जनसूचना अधिकारी श्री इंद्रजीत विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी,इलाहाबाद व मुख्य कोषाधिकारी, इलाहाबाद। आवास-स्ट्रेची रोड, सिविल लाइन्स, इलाहाबाद कार्यालय-१२ डी,कमलानेहरू मार्ग, इलाहाबाद
प्रथम अपीलीय अधिकारी श्री प्रदीप कुमार्, सचिव,हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद व अपर जिलाधिकारी(नगर्), इलाहाबाद। आवास-कलेक्ट्रेट, इलाहाबाद कार्यालय-१२डी, कमलानेहरू मार्ग, इलाहाबाद
दूरभाष कार्यालय - (०५३२)- २४०७६२५
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बुधवार, 21 अक्टूबर 2009

हिन्दी चिट्ठाकारी की दुनिया: राष्ट्रीय संगोष्ठी में स्वागत है।

महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
एवं
हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद
के दो दिवसीय संयुक्त आयोजन
हिन्दी चिट्ठाकारी की दुनिया: राष्ट्रीय संगोष्ठी
में आप सादर आमन्त्रित हैं।

विनीत:

संतोष भदौरिया (संयोजक)
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी (सह-संयोजक)

कार्यक्रम की रूपरेखा:

प्रथम सत्र (उद्घाटन) :
२३
अक्टूबर,२००९ पूर्वाह्न ११ बजे।
स्थान: हिन्दुस्तानी एकेडेमी सभागार, इलाहाबाद
१२ डी, कमला नेहरू मार्ग, इलाहाबाद (प्रयाग संगीत समिति के निकट)
मुख्य अतिथि: डॉ. नामवर सिंह
अध्यक्ष: श्री विभूति नारायण राय, कुलपति
विशिष्ट अतिथि: श्री राकेश, विशेष कर्तव्य अधिकारी (संस्कृति),विश्वविद्यालय-वर्धा
श्री राम केवल, सचिव- हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद
विषय प्रवर्तन: श्री ज्ञान दत्त पाण्डेय, चिट्ठाकार- मानसिक हलचल
हिन्दी चिट्ठाकारी- इतिहास, स्वरूप और तकनीक
वार्ताकार: रविशंकर श्रीवास्तव (रवि रतलामी- रचनाकार), अनूप शुक्ल (फुरसतिया), अजित बडनेरकर

पुस्तक
विमोचन:
सत्यार्थमित्र- ब्लॉगजगत का एक झरोखा
ब्लॉग लेखक: सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
पुस्तक चर्चा:
प्रो. राजेन्द्र कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
प्रो. अली अहमद फातमी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
प्रो. अजय जेतली, इलाहाबाद विश्वविद्यालय


द्वितीय सत्र:
२३ अक्टूबर, अपराह्न :३० बजे
स्थान: क्षेत्रीय केन्द्र, महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
२४/२८ सरोजिनी नायडू मार्ग, इलाहाबाद (YMCA के सामने)
अभिव्यक्ति की उन्मुक्तता एवं इसमें निहित खतरे
ब्लाग जगत के कुंठासुर/बेनामी या छद्मनामी टिप्पणीकार
पत्रकारिता और चिट्ठाकारी
अभिव्यक्ति की उन्मुक्तता एवं इसपर नियन्त्रण -कुछ सुझाव
मुख्य धारा के जनसंचार माध्यम एवं ब्लॉग-संचार

तृतीय सत्र:
२४ अक्टूबर, ११ बजे पूर्वाह्न
स्थान:क्षेत्रीय केन्द्र-महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
२४/२८ सरोजिनी नायडू मार्ग, इलाहाबाद (YMCA के सामने)

अन्तर्जाल पर हिन्दी भाषा साहित्य:
हिन्दी चिट्ठाकारी पर बहस के मुद्दे
अन्तर्जाल पर हिन्दी साहित्य की पठनीयता
चिट्ठाकारी की भाषा बनाम सम्प्रेषणीयता
चिट्ठों के माध्यम से विज्ञान संचार
चिट्ठाजगत में हिन्दी कविता की नवीन प्रवृत्तियाँ।
हिन्दी कविता और ब्लॉगजगत

चतुर्थ सत्र:
२४ अक्टूबर, अपराह्न :३० बजे
चिट्ठाकारी का तकनीकी पक्ष
हिन्दी के कुशल प्रयोग के औजार
ब्लाग बनाने की तकनीक और प्रबन्धन
ब्लॉग एग्रीगेटर (चिट्ठा संकलक),फीड, ब्लॉगसेवा प्रदाता
ब्लॉग की सक्रियता और ब्लॉग से आय की सम्भावनाएं।
चिट्ठाकारी: समय प्रबन्धन एवं उपादेयता

जिन आमन्त्रित ब्लॉगर अतिथियों ने अपने आगमन की सहर्ष स्वीकृति देते हुए समय से अपनी यात्रा का विवरण प्रस्तुत कर दिया है उनके अवस्थान की समुचित व्यवस्था कर दी गयी है। अपेक्षा के अनुरूप ही इस कार्यक्रम की सपलता के लिए सभी ओर से सक्रिय सहयोग और समर्थन हमें मिलता जा रहा है। इसके लिए हम आप सभी के हृदय से आभारी हैं।

सभी प्रतिभागियों, अतिथियों, श्रोताओं, दर्शकों और मीडिया के सहयोगियों का इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में हार्दिक स्वागत अभिनन्दन।


स्वागतोत्सुक:
हिन्दुस्तानी एकेडेमी परिवार

बुधवार, 17 सितंबर 2008

हिन्दुस्तानी त्रैमासिक के लेख पोस्ट करने में तकनीकी बाधा

हिन्दी प्रेमी मित्रों,
इस ब्लॉग पर पोस्ट करने के लिए मैंने एकेडेमी के बारे में लिखे गये कुछ लेख वहाँ से अपनी पेन-ड्राइव में भरकर यहाँ अपने कम्प्यूटर में चढ़ा रखे हैं। ये लेख हिन्दुस्तानी त्रैमासिक में प्रकाशित होने वाले हैं। एकेडेमी के कम्प्यूटर पर यह ‘कुंडली फॉन्ट में टाइप किया हुआ था। वहीं से लाकर मैने उसे यहाँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया तो एक विकट समस्या आ खड़ी हुई।

हुआ ये कि जब मैने आलेख को कॉपी करके ब्लॉगर के पोस्ट फील्ड (window) में चिपकाया तो पूरी सामग्री अनजाने अक्षरों में बदल गयी। जानकार लोग तो समझ ही गये होंगे कि यह समस्या यूनीकोड व्यवस्था की है। यानि जो अक्षर यूनीकोड समर्थित नहीं हैं, उन्हें यहाँ नकल-चिपकाने पर रूप बदल कर अपठनीय हो जा रहे हैं। इतना ज्ञान मुझे तब हुआ जब मैने इस समस्या को अपने गुरुदेव से बतायी। लेकिन समस्या जानने के बावजूद इसका समाधान नहीं हो सका है। हमारे सरकारी दफ़्तर को तकनीकी सुविधा मुहैया कराने वाली संस्था NIC के स्थानीय मुखिया ने कुंडली फॉण्ट को यूनीकोड में परिवर्तित करने का कोई सॉफ़्टवेयर होने से अनभिज्ञता जाहिर कर दी।

सारथी पर यूनीकोड रिपेयर औंजार का लिंक भी मेरे काम नहीं आ सका। कदाचित् मैं इसे समझ नहीं पा रहा हूँ। अन्य श्रोतों को आजमाने में डर इस लिए रहा हूँ कि जानकारी कम है, कहीं ज्यादा छेड़छाड़ से कम्प्यूटर की वर्तमान सेटिंग न बिगड़ जाय।

यदि मुझे कुंडली को यूनीकोड में बदलने का जुगाड़ नहीं मिला तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। पूरी सामग्री barahaIME पर दुबारा टाइप करने में तो मेरे दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली दम तोड़ देगी। इस प्रकार यदि परिवर्तक औंजार नहीं मिल सका तो पूरी सामग्री आपके सामने लाने का मेरा सपना ही टूट जाएगा। ...सोचता हूँ, यह ब्लॉग फिर किस काम आएगा?

मुझे लगता है कि जो लोग इस तकनीक के जानकार हैं वे मेरी इस बात पर मुस्करा रहे होंगे। कहते होंगे, “खूब फँसे हो बेटा! अब झेलो... थोड़ा और झेल लो उसके बाद तो हम धीरे से सरल उपाय बता ही देंगे। कम्प्यूटर पर दसों उंगलियाँ तो चलती नहीं, चले हैं ब्लॉगर बनने... अब देखो मजा... मिट्टी के माधो... बस तर्जनी चला कर इतरा रहे थे।”

लेकिन अब मैं बहुत झेल चुका हूँ, हार मानता हूँ।

अतः, हे परम आदरणीय -स्वामियों, -गुरुओं, -सम्राटों, मेरी बेचैनी को और अधिक बढ़ाने के बजाय झट से वह जुगाड़ भेज दीजिए जिससे मेरा काम आसान हो जाय। सच कहता हूँ, यदि आपने नहीं बताया, और मैं जिद में पूरा का पूरा लेख एक उंगली से टाइप करने लगा तो मेरे घर में समय के लिए जो मार-काट मचेगी और जो अनेकानेक दूसरी समस्याएं उठ खड़ी होंगी, उसका सारा पाप आपलोगों के सिर जाएगा। जब एक निरीह ब्लॉगर की दुर्दशा करने का आरोप लिए घूमना पड़ेगा तो मुझे दोष मत दीजिएगा।

...शायद आप मेरी इस अपील के मर्म को समझ गये होंगे। तो जल्दी कीजिए, मेरे ई-मेल पर या यहीं टिप्पणी के माध्यम से आपात सहायता तत्काल भेजिए।
प्रतीक्षा में-
आपका अबोध अनुज
(सिद्धार्थ)
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