हिन्दुस्तानी एकेडेमी में जन सूचना अधिकार का सम्मान

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प्रथम अपीलीय अधिकारी श्री प्रदीप कुमार्, सचिव,हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद व अपर जिलाधिकारी(नगर्), इलाहाबाद। आवास-कलेक्ट्रेट, इलाहाबाद कार्यालय-१२डी, कमलानेहरू मार्ग, इलाहाबाद
दूरभाष कार्यालय - (०५३२)- २४०७६२५

Tuesday, August 11, 2009

पुस्तक चर्चा: एक संग्रहणीय ग्रन्थ



राजतरंगिणी और कश्मीर नरेश
लेखक डॉ० उमेश कुमार मिश्र
मूल्य ११० रुपये पृष्ठ १५२ सजिल्द
प्रकाशन वर्ष २००९


वस्तुत: पूर्वाग्रह रहित होकर घटनाओं का यथातथ्य वर्णन करना ही इतिहास है। इस वैशिष्ट्य से युक्त राजतरंगिणी अपनी काव्यात्मक सरसता के कारण इतिहास ग्रन्थ के अतिरिक्त उत्कृष्ट काव्य भी है। इसके ऐतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक तथा राजनैतिक वर्णनों की प्रामाणिकता असंदिग्ध है, क्योंकि नीलमतपुराण इसका प्रमाण है, जो कल्हण के सामने था।
भारतवर्ष के प्राचीन काव्य रामायण तथा महाभारत के समान ही राजतरंगिणी मध्ययुगीन गौरवग्रन्थ है। यद्यपि इस ग्रन्थ में कश्मीर के कतिपय राजाओं तथा मंत्रियों का चरित्र ही लेखबद्ध किया गया है, तो भी तत्कालीन राजाओं, मंत्रियों के चारित्रिक विशेषताओं की पर्याप्त झलक मिल जाती है। साथ ही सम्यक् समीक्षण-दृष्टि के कारण ग्रन्थ की उपयोगिता कश्मीर की तत्कालीन राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक स्थिति की दृष्टि से अत्यधिक बढ़ जाती है।

प्रस्तुति: हिन्दुस्तानी एकेडेमी

7 comments:

  1. कुछ अधिक जानकारी मिलती तो पाठक को कंटेंट समझने में सुवाधा होती। पुस्तक परिचय के लिए आभार।

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  2. ऐसे लेखकीय प्रयासों की आशंसा की ही जानी चाहिए। और वर्तमान में काश्मीर को लेकर दावेदारी की आग लगाने वालों को यह इतिहास याद दिलाना जरूरी है।


    _____________________________________

    "कविता की जातीयता" के कवर-चित्र के नीचे इसकी पृष्ठ संख्या सही कर दें - 366 ( वहाँ 266 टाईप हो गया है) :))

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  3. kashmeer ke raajaaon aur mantriyon ki chaaritrik jaankaari wali krati se vahan ke parivesh aur samajik sarokaaro ka bhi pata chalega . aapka prayaas saraahneey hai.
    - vijay

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  4. राजतरंगिणी और कश्मीर नरेश-पुस्तक परिचय के लिए धन्यवाद !

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  5. थोडा विस्तार दे .किताब के कंटेंट का

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  6. Sidebar mein aaya hua sandesh
    Kripya vahan uttar dein-
    ------------------------------

    12 अगस्त 09, 12:40
    sadan Jha: मैं राम नरेश त्रिपठी लिखित, घाघ और भड्‍डरी पुस्‍तक तलाश रहा हूँ। यह हिँदुस्‍तानी एकेडमी से प्रकाशित हुआ था। क्‍या इसकी प्रति उपलब्‍ध है? प्रक्रिया की जानकारी देने का कष्‍ट करें।

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